स्वदेशी स्वावलंबी भारत अभियान

भारत के खुदरा व्यापारियों का महाकुंभ

यह अनुभाग "स्वदेशी व्यापारी जुटान" के मूल उद्देश्य को स्पष्ट करता है। यह आंदोलन केवल एक व्यापारिक बैठक नहीं है, बल्कि देश के करोड़ों छोटे दुकानदारों और रेहड़ी-पटरी वालों के अस्तित्व, स्वावलंबन और अधिकारों की रक्षा के लिए स्वदेशी जागरण मंच द्वारा शुरू किया गया एक राष्ट्रव्यापी वैचारिक और आर्थिक अभियान है।

क्षेत्र की व्यापकता और जनसांख्यिकी

इस अनुभाग का उद्देश्य डेटा विज़ुअलाइज़ेशन के माध्यम से यह साबित करना है कि खुदरा व्यापार कृषि के बाद भारत का सबसे बड़ा रोजगार प्रदाता है। यहाँ आप देख सकते हैं कि यह क्षेत्र न केवल संख्या में विशाल है, बल्कि सामाजिक समावेश (SC/ST/OBC और महिलाओं की भागीदारी) में भी सबसे आगे है।

रोजगार और आजीविका का प्रभाव (करोड़ में)

सामाजिक समावेश (पंडित दीनदयाल जी का 'अंत्योदय')

प्रोफेसर आर. वैद्यनाथन की पुस्तक 'इंडिया अन-इंक' के आंकड़ों पर आधारित

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1.5 करोड़
खुदरा दुकानें
🛒
2 करोड़
रेहड़ी-फेरी वाले
👥
8 करोड़
प्रत्यक्ष रोजगार
👨‍👩‍👧‍👦
25 करोड़
आश्रित आबादी

आज की मुश्किलें और परेशानियां

यह अनुभाग उन गंभीर खतरों को उजागर करता है जिनका सामना छोटे व्यापारी कर रहे हैं। नीचे दिए गए बटनों पर क्लिक करके बहुराष्ट्रीय कंपनियों, बड़े मॉल्स और प्रशासनिक नीतियों के कारण उत्पन्न होने वाले संकटों के बारे में विस्तार से पढ़ें।

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व्यापारियों का सामाजिक योगदान

व्यापारी केवल अर्थव्यवस्था ही नहीं चलाते, बल्कि वे समाज के ताने-बाने का अभिन्न अंग हैं। इस अनुभाग में व्यापारियों द्वारा समाज को दी जाने वाली अदृश्य लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण सेवाओं को दर्शाया गया है, जो ई-कॉमर्स कंपनियां कभी नहीं दे सकतीं।

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गरीबों का सहारा

स्ट्रीट वेंडर स्वयं गरीब होते हैं, परंतु वे समाज के अंतिम व्यक्ति को घर बैठे सस्ती वस्तुएं उपलब्ध कराते हैं। बिना कागजी कार्रवाई के गरीबों को 'उधार' देकर वे सामाजिक सुरक्षा जाल बनाते हैं।

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मानवीय CCTV

गली-मोहल्ले के दुकानदार और फेरीवाले 24/7 क्षेत्र की निगरानी करते हैं। पुलिस तफ्तीश में सबसे सटीक जानकारी इन्हीं से मिलती है। ये अपराध रोकने में सहायक हैं।

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सांस्कृतिक संरक्षण

मंदिरों की मरम्मत, गौशालाओं को चंदा, कुएं-बावड़ी का रखरखाव और सार्वजनिक लंगर लगाने का काम सबसे ज्यादा यही छोटे दुकानदार अपनी जिम्मेदारी समझकर करते हैं।

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सामाजिक सद्भाव

विभिन्न वर्गों (विशेषकर पिछड़े वर्गों) के लोगों को रोजगार और व्यापार का अवसर देकर ये सामाजिक ताने-बाने और सद्भाव को सुरक्षित रखते हैं।

हमारा स्वदेशी संकल्प और कार्ययोजना

इस अंतिम अनुभाग में नागपुर और दिल्ली की बैठकों में लिए गए निर्णयों और भविष्य की कार्ययोजनाओं को सूचीबद्ध किया गया है। यह इस बात का खाका है कि व्यापारी इन चुनौतियों का सामना कैसे करेंगे।

  • 1

    स्वदेशी कोना (Swadeshi Corner)

    प्रधानमंत्री जी के आह्वान पर, हर दुकानदार अपनी दुकान में एक 'स्वदेशी कोना' बनाएगा। हमारा संकल्प है कि देश में बनी वस्तुओं को आगे ले जाया जाए और स्वदेशी सामान की खपत बढ़ाई जाए।

  • 2

    ई-कॉमर्स नियामक आयोग की मांग

    ऑनलाइन व्यापार से आ रही तकलीफों और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के अवैध रास्तों पर लगाम लगाने के लिए सरकार से ई-कॉमर्स के लिए एक सख्त नियामक आयोग (Regulatory Commission) बनाने की मांग की जाएगी।

  • 3

    एकादश टोली और जमीनी विस्तार

    स्वदेशी व्यापारी जुटान के कार्यक्रम को प्रांतीय, जिला, तहसील और कस्बों तक योजनाबद्ध तरीके से ले जाने के लिए 11 लोगों की टीमें (एकादश टोली) बनाई जाएंगी जो जनसंपर्क करेंगी।

  • 4

    सहकारी खरीद और स्वदेशी व्यापार कोष

    बड़े मॉल्स की तर्ज पर सस्ते सामान की खरीद के लिए 'सहकार भारती' के साथ मिलकर कोऑपरेटिव (सहकारी) खरीदारी की जाएगी। डिजिटल अभियान चलाने के लिए 'स्वदेशी व्यापार कोष' का निर्माण और दिल्ली में केंद्रीय कार्यालय बनाया जाएगा।

आधिकारिक दस्तावेज एवं रूपरेखा

प्रेस विज्ञप्ति

नागपुर बैठक की आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति

संकल्पना पत्र 1 संकल्पना पत्र 2 नोट्स

आंदोलन के आंतरिक संकल्पना पत्र एवं नोट्स